रक्तदान खून बहाया है वीरों ने, देश की मिट्टी के खातिर, आओ हम भी रक्तदान करें , किसी के जीवन के खातिर रक्त की कोई बरसात नहीं होती, ना ही कोई चापाकल होती है, यह सिर्फ इन्सानों और जानवरों में बहती है। इंसान को बचाने के लिए इंसान का ही खून चाहिए, जिसका हम उत्पादन नहीं कर सकते, सिर्फ और सिर्फ दान कर सकते हैं। जो भी व्यक्ति रक्तदान करने के योग्य है, उसे अवश्य दान करना चाहिए। रक्तदान करने वाले शरीर को दिल की बीमारियां का खतरा कम हो जाता है, आयरन की अतिरिक्त मात्रा नियंत्रित हो जाती है, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और कैंसर व दूसरी बीमारी के होने का खतरा भी कम हो जाता है। ये रक्तदान एक ऐसी प्रक्रिया है,जब व्यक्ति अपनी बीमारियों के साथ दूसरों की आवश्यकता के लिए रक्त देते हैं। ये हमे एक ऐसा अवसर प्राप्त कराता है, जिससे किसी का जान बचा कर , हम अच्छे कर्म में अपना नाम दर्ज करा सके। और जैसा कि हमारे सबसे पवित्र ग्रंथ गीता में लिखा है- "योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय। सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।" धर्म का अर्थ होता है कर्तव्य, तो आइए अपना धर्म अपना...