Women's day Speech
नारी ख़ूबसूरती का भंडार ,और प्यार का आभार आरम्भ हुई दुनिया जिससे, जिसे कहते है हम संसार, जो धरती के भाती सहती है ..आंसू, जड़ों की भांति , संभालतीं है.. पीड़ा, समुन्द्र की भांति,लहराती हैं... आंचल, मुसीबतों पे यूहीं मुस्कुराती हो, सैयम हो जिसका स्वाभाव, शब्द हो जिसका अनमोल, ताकत हो जिसकी तलवार में, वो शक्ति है एक नारी में । यह नादानी भी ना, सच में बेमिसाल है, अंधेरा दिल में है ,और दीया लोग मंदिरों में जलाते हैं उसी प्रकार गंदगी सोच में है, और गलत लोग नारियों को कहते हैं। अनेक चुनौतियों से जूझते हुए महिला हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। विज्ञान के क्षेत्र से लेकर देश की सीमाओं तक महिलाओं ने अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है। आज हम और हम जैसे कई महिलाएं सावित्री बाई जैसी महिलाओं के कारण है ।जो कठिन परिश्रम पर शिक्षा हेतु नियंत्रण चुनौतियों से जूझती रही। आज भी हमारे देश की बहुत सारी लड़कियों का ना कोई सपना है और ना ही कोई लक्ष्य वह अपनी पूरी की पूरी जिंदगी किसी को समर्पित कर देती हैं इस दुनिया में महिलाओं के लिए जो शब्द का प्रयोग किया जाता है वह सब का मतलब ही कमज...