Women's day Speech
नारी
ख़ूबसूरती का भंडार ,और प्यार का आभार
आरम्भ हुई दुनिया जिससे,
जिसे कहते है हम संसार,
जो धरती के भाती सहती है ..आंसू,
जड़ों की भांति , संभालतीं है.. पीड़ा,
समुन्द्र की भांति,लहराती हैं... आंचल,
मुसीबतों पे यूहीं मुस्कुराती हो,
सैयम हो जिसका स्वाभाव,
शब्द हो जिसका अनमोल,
ताकत हो जिसकी तलवार में,
वो शक्ति है एक नारी में ।
यह नादानी भी ना, सच में बेमिसाल है,
अंधेरा दिल में है ,और दीया लोग मंदिरों में जलाते हैं
उसी प्रकार गंदगी सोच में है, और गलत लोग नारियों को कहते हैं।
अनेक चुनौतियों से जूझते हुए महिला हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। विज्ञान के क्षेत्र से लेकर देश की सीमाओं तक महिलाओं ने अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है। आज हम और हम जैसे कई महिलाएं सावित्री बाई जैसी महिलाओं के कारण है ।जो कठिन परिश्रम पर शिक्षा हेतु नियंत्रण चुनौतियों से जूझती रही।
आज भी हमारे देश की बहुत सारी लड़कियों का ना कोई सपना है और ना ही कोई लक्ष्य वह अपनी पूरी की पूरी जिंदगी किसी को समर्पित कर देती हैं
इस दुनिया में महिलाओं के लिए जो शब्द का प्रयोग किया जाता है वह सब का मतलब ही कमजोर होता है। महिलाओं को अंग्रेजी में फीमेल कहते हैं जो फेमिनिज्म शब्द से उत्पन्न हुआ है ,उसका मतलब ही विक होता है।
औरत संसार की किस्मत है,
फिर भी किस्मत की मारी है
औरत आज भी जिंदा जलती है
कल चिता पे जलती थी ,
कब बदलेगी सोच लोगों की ,
कब बदलेगी किस्मत नारी की,
जो शक्ति एक नारी के पास है, वह शक्ति ईश्वर ने पूरे ब्रह्मांड में किसी को नहीं दिया ,प्राचीन काल से नारियों ने अपने हुनर से अपना पहचान बनाए है,यह हमारे देश में ही नहीं बल्कि अनेक देश में ऐसे कठिनाइयों और परेशानियों से महिलाओं को जूझना पड़ता है।
Mary Ann Evans,जो कि 18वीं सदी में एक उपन्यासकार, कवि, पत्रकार और अनुवादक थी, विक्टोरियन काल की प्रमुख अंग्रेजी लेखिका थी,परंतु वह अपनी कोई भी उपन्यास, कविता अपने नाम से प्रकाशित नहीं करती थी। क्योंकि लोग महिलाओं का लिखा हुआ में रुचि नहीं रखते थे। वह अपने उपनाम जॉर्ज इलियट के नाम से जानी जाती थी।वह अपने किताब Middle March, Adam bade से विश्व प्रसिद्ध हुई, तब जाकर दुनिया में उनकी असली नाम से पहचान बनी।
प्राचीन काल में महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपना वेशभूषा बदलना पड़ता था।वह पुरुषों के वेशभूषा में रहकर अपना सपना पूरा करती थी ,और अपने हुनर को सामने लाती थी।
अत्यधिक प्रयास के बाद लोगों का सोच बदल रहा है, आज हर पिता अपनी बेटी को शिक्षा प्रदान करना चाहता है ,अब पति अपनी पत्नी को काम करने पर ऐतराज नहीं जताते।
इसका प्रत्येक उदाहरण है
प्रीति पटेल जो अपनी हुनर काबिलियत क्षमता और शक्तिशाली ढंग से आज वह ब्रिटेन की गृहमंत्री हैं, जो देश हमें कई सालों तक गुलाम बनाया उस देश में एक इंडियन ओरिजिन महिला गृहमंत्री है, यह बहुत गर्व की बात है।
तानिया शेरगिल जो आपने दृढ़ता से सेना को की ऑफिसर हैं और फिर से 1 महीना पूरे देश के पुरुषों को मार्ग दिखा रही हैं,
रानी लक्ष्मीबाई ,,मदर टेरेसा, कल्पना चावला और ना जाने कितनी महिलाएं अपने हुनर से लोगों के सामने आई और दुनिया के सोच को बदलने में मदद कि, जिनके कारण आज हम और हम जैसे कितनी लड़कियां अपने मुकाम पे पहुंचने का सोच पा रहे हैं।
उन सभी को तहे दिल से धन्यवाद एवं हैप्पी वूमंस डे।
- ऋषिका गुप्ता
For e-book click on the link

Comments
Post a Comment